‘शासकीय जमिनींवरील सहकारी गृहनिर्माण संस्थांमधील सदनिका भाड्याने देण्यासाठी आता परवानगीची गरज नाही’

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महसूल विशेष वृत्त
  
मुंबई, दि. 11 : राज्यात ज्या सहकारी गृहनिर्माण संस्थांना शासकीय जमीन निवासी प्रयोजनार्थ दिलेली आहे, अशा  संस्थांमधील सदनिका  वापरण्याच्या अनुज्ञप्ती (लिव्ह ॲण्ड लायसन्स) वर दिलेली असेल तर या सदनिका  भाड्याने देतांना आता जिल्हाधिकारी यांची पूर्व परवानगीची आवश्यकता नाही किंवा त्यांना त्याबाबत अवगत करण्याची गरज नाही तसेच कोणतेही अनुज्ञप्ती शुल्क (लायसन्स फी) भरण्याची आवश्यकता नाही .  या संबधिचा शासन निर्णय महसूल विभागाने नुकताच जारी केला आहे.

महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, 1966 च्या कलम 37 अ मधील सुधारणेनंतर महसूलमंत्री बाळासाहेब थोरात यांच्या मार्गदर्शनात हा निर्णय निर्गमित करण्यात आला आहे.  यामधील तरतुदीनुसार विक्री, हस्तांतरण, पुनर्विकास, वापरातील बदल, विकास हक्कांचे हस्तांतरण, अतिरिक्त चटईक्षेत्र निर्देशांकाचा वापर इत्यादी बाबींच्या अनुषंगाने राज्य शासनाच्या पूर्व परवानगी संदर्भात तरतूद असून त्यात लिव्ह ॲण्ड लायसन्स या तत्वाचा समावेश नाही. तसेच सहकारी गृहनिर्माण संस्थांमधील सदनिका लिव्ह ॲण्ड लायसन्सच्या कराराने वापरण्यास दिल्यामुळे या सदनिकेच्या मालकीचे तसेच भाडेपट्ट्याचे हस्तांतरण होत नाही. अशा लिव्ह ॲण्ड लायसन्सच्या करारामुळे केवळ संबंधित सदनिकेच्या वापराचा अधिकार संबधित व्यक्तीला दिला जातो. म्हणून शासकीय जमिनींवरील सहकारी गृहनिर्माण संस्थांमधील सदनिका लिव्ह ॲण्ड लायसन्स या तत्वावर वापरण्यासाठी देतांना आता परवानगीची तसेच शुल्क भरण्याची आवश्यकता नाही असे या शासन निर्णयानुसार स्पष्ट झाले आहे.

मुंबई शहर, मुंबई उपनगर तसेच इतर मेट्रो शहरांमध्ये राज्यभरात अशा सुमारे एक हजारापेक्षा गृहनिर्माण संस्था आहेत. यात आजी-माजी सैनिकांसाठीच्या संस्था, युद्ध पश्चात पुनर्विकास गृहनिर्माण संस्था, विविध प्रवर्गातील अधिकारी कर्मचारी यांच्या संस्था, शास्त्रज्ञ व इतर विशेष व्यक्ती, मागासवर्गियांसाठीच्या गृहनिर्माण संस्था यांचा समावेश आहे. या निर्णयामुळे सामान्य जनतेला दिलासा मिळाला आहे.
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अर्चना शंभरकर/ महसूल/ ११-२-२०/वि.वृ
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सरकारी जमीन पर हैऐसी सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं की
सदनिका किराए से देने के लिए अब अनुमति की आवश्यकता नहीं’

मुंबईदि. 11 : राज्य में जिन सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं को सरकारी जमीन निवासी प्रयोजनार्थ दी हैऐसे संस्थाओं की सदनिका के उपयोग की अनुज्ञप्ति (लिव एंड लाइसेन्स) पर दी गई हैतब यह सदनिका किराए से देते समय अब जिलाधिकारी की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं हैतथा उन्हें इस बारे में सूचित करने की भी जरूरत नहीं होगीसाथ ही किसी भी प्रकार का अनुज्ञप्ति शुल्क (लायसन्स फी) भरने की भी जरूरत नहीं हैइससे संबधित शासन निर्णय राजस्व विभाग ने हाल ही में जारी किया है।

महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, 1966 की धारा 37 अ में दुरुस्ती के बाद राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात के मार्गदर्शन में यह निर्णय निर्गमित किया गया है। इसके प्रावधान के अनुसार विक्रीहस्तांतरणपुनर्विकासउपयोग में किया जानेवाला बदलावविकास अधिकार का हस्तांतरणअतिरिक्त चटईक्षेत्र निर्देशांक का उपयगोग आदि बिंदुओं के मद्देनज़र राज्य सरकार के पूर्व अनुमति के संदर्भ में प्रावधान है और इसमें लिव एंड लायसन्स का समावेश नहीं है। साथ ही सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं की सदनिका लिव एंड लायसन्स के करार पद्धति से उपयोग के लिए देने के कारण इन सदनिका का मालिकी का एवं किराए का (भाडेपट्ट्याचे) हस्तांतरण नहीं होता। ऐसे लिव एंड  लायसन्स के  करार के कारण केवल संबंधित सदनिका के उपयोग का अधिकार संबधित व्यक्ति को ही दिया जाता है। इसलिए सरकारी जमिन पर हैऐसी सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं की सदनिका लिव एंड  लायसन्स इस बेसिस पर उपयोग के लिए देते समय अब अनुमति की एवं शुल्क भरने की आवश्यकता नहीं हैऐसे इस शासन निर्णय के तहत स्पष्ट हुआ है।
           
मुंबई शहरमुंबई उपनगर एवं अन्य मेट्रो शहरों में राज्यभर में ऐसे तकरीबन एक हजार से अधिक गृहनिर्माण संस्थाएं है। इसमें पूर्व-वर्तमान (आजी-माजी) सैनिकों के लिए संस्थायुद्ध पश्चात पुनर्विकास गृहनिर्माण संस्थाविविध प्रवर्ग के अधिकारी एवं कर्मचारियों की संस्थाशास्त्रज्ञ एवं अन्य विशेष व्यक्तिमागासवर्गियों के लिए गृहनिर्माण संस्थाएं शामिल है। इस निर्णय के कारण अब आम जनता को राहत मिली है।

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No need for permission to rent apartment in Co-operative Housing Societies on Government lands

Mumbai, 11.Feb.20: If a permit is given on a leave and license for use of houses belonging to cooperative housing societies in the state for which the government land is given for residential purposes, renting of these premises does not require the prior permission of the District Collector, nor do they need to be informed and no need to pay license fee too.  The Revenue Department has recently issued related government resolution.

This decision has been issued under the guidance of Minister of Revenue Balasaheb Thorat after amending section 37A of the Maharashtra Land Revenue Code, 1966. As per the provisions of this Act, there are some rules in respect of prior permission of the State Government in connection with the matters of sale of the apartments, transfer, redevelopment, change of use, transfer of development rights, use of additional carpet area which does not include the principle of live and license. Also, the ownership and lease of the premises does not transfer due to the use of the house by the contract of live and license in the cooperative housing societies. Such Leave and License Agreement grants only the right of use of the respective premises to the concerned person. Therefore, it is clear that no longer need to be allowed or paid for use on the basis of leave and licensee on cooperative housing societies on government land.

There are more than one thousand housing societies in Mumbai, Mumbai suburbs and other metro cities across the state. These include formers and present soldiers’ organizations, post-war rehabilitation housing societies, officers of various classes, scientists and other special person, housing for backward classes. This decision has brought relief to the general public.

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