अकरावी प्रवेशासंदर्भात विद्यार्थ्यांचे नुकसान होऊ देणार नाही - शिक्षणमंत्री विनोद तावडे

कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत





मुंबई दि. 13: गेल्या काही दिवसांपासून अकरावी प्रवेशासंदर्भात विद्यार्थी आणि पालक यांच्या मनात साशंकता असली तरी विद्यार्थ्यांचे नुकसान राज्य शासन होऊ देणार नाही असे शिक्षण मंत्री विनोद तावडे यांनी स्पष्ट केले.

अकरावी प्रवेश प्रक्रिया नियमित वेळापत्रकानुसारच सुरु करण्यात येत असून या प्रक्रियेला कोणताही विलंब झालेला नाही. अकरावीच्या प्रवेश प्रक्रियेत सीबीएसई, आयसीएसई बोर्डाच्या मुलांना प्रवेशात प्राधान्य मिळेल मात्र राज्य मंडळाच्या विद्यार्थ्यांना प्रवेशात प्राधान्य मिळणार नाही, अशी अनाठायी भीती व्यक्त करण्यात येत असून अनेक पालक अकरावी प्रवेशासाठी आपल्याला भेटत असल्याचे श्री. तावडे यांनी सांगितले. राज्य मंडळ, सीबीएसई आणि आयसीएसई विद्यार्थ्यांचे समान पातळीवर मूल्यमापन होणे आवश्यक आहे. अकरावी प्रवेशासाठी काही नामांकित महाविद्यालयांमध्ये प्रवेशासाठी चढाओढ असते. हे लक्षात घेता या महाविद्यालयांमधील जागा वाढविता येऊ शकतील का याबाबत बैठक घेण्यात येणार आहे.


राज्य मंडळाच्या विद्यार्थ्यांना यंदा अंतर्गत गुण बंद करण्यात आल्याने त्यांना मिळालेल्या लेखी परीक्षेच्या गुणांच्या आधारावर अकरावीची प्रवेश प्रक्रिया होणार आहे. याच पद्धतीने सीबीएसई, आयसीएसई या विद्यार्थ्यांना त्यांच्या लेखी परीक्षेच्या गुणांच्या आधारावर अकरावीत प्रवेश देण्यात यावा, मात्र त्यांचे तोंडी परीक्षेचे अंतर्गत गुण प्रवेशावेळी ग्राह्य धरण्यात येऊ नये अशी मागणी होत आहे. याबाबत राज्य सरकारच्यावतीने केंद्रीय मनुष्यबळ विकासमंत्री, त्याचप्रमाणे सीबीएसई, आयसीएसई बोर्ड यांच्याशी चर्चा करण्यात येत आहे.


गेल्या काही वर्षांची अकरावीच्या प्रवेश प्रक्रियेची आकडेवारी पाहता आयबी, आयसीएसई आदी बोर्डाच्या केवळ ७ ते ९ इतक्या कमी संख्येने विद्यार्थी प्रवेश घेतात. याहून विद्यार्थ्यांची संख्या जास्त नाही. सीबीएसई व आयसीएसई बोर्डाचे सुमारे साडेचार टक्के विद्यार्थी अकरावीला प्रवेश घेतात, ही वस्तुस्थिती असल्याची बाब श्री. तावडे यांनी यावेळी निदर्शनास आणली.
०००००

Students will not be put at a loss under any circumstances -- Vinod Tawade
Mumbai dated 13 : The Education Minister Shri Vinod Tawade today clarified that the state Government will ensure that no student is put at loss despite doubts in the minds of the parents and the students with respect to the admission to Eleventh Standard .
Shri Tawade asserted that the regular admission process to the eleventh standard will commence as per the original schedule.and there is no delay therein.  He further stated that he fears that the I C S E  Board and C B S E Board students will get preference over the Maharashtra State Board passed students in the admission process to the eleventh standard is totally misplaced and many parents are calling on him for admissions of the students to eleventh standard. There evaluation of the students of  I C S E  Board and C B S E Board students   and Maharashtra State Board passed students should be on equitable basis. Considering the fact that there is acute competition for admissions to colleges of renowned .institutions, a meeting will be convened to explore the possibility of increasing the number of intake capacity in these colleges. .
The eleventh standard admission process of the students who have cleared the Maharashtra State Board of Secondary and Higher Secondary Education exams will be conducted on the basis of the written examinations since the system of internal evaluation has been done away with, with effect  from the previous year. Hence demands have been  raised that the admissions of the I C S  E and C B  S E board students to the eleventh standard should be conducted on the basis of score in written examinations only. In this connection the State Government is discussing the matter with the Union Minister for Human Resources Development, C B  S E  and I C S E. .
Considering the figures of the admissions to the eleventh standard during the last few years, merely 7 to 9 % of the I C S E and C B S E students seek admissions to these boards for further studies. Shri Tawade drew attention to the fact that  merely four and half percent students seek admission to the eleventh standards of I C S E and C B S E  Boards.

0000




छात्रों का नुकसान नहीं होने देंगे -- विनोद तावडे
मुंबई दि. 13: पिछले कुछ दिनों से ग्यारहवीं प्रवेश के संदर्भ में छात्र और परिजनों के मन में संदेहास्पद स्थिति रही है, फिर भी राज्य सरकार छात्रों का नुकसान नहीं होने देंगे, यह शिक्षा मंत्री विनोद तावडे ने स्पष्ट किया है।
ग्यारहवीं प्रवेश प्रक्रिया नियमित समयसारणी के अनुसार ही शुरू की जाएगी और इस प्रक्रिया को किसी भी देरी नहीं हुई है। ग्यारहवीं के प्रवेश प्रक्रिया में सीबीएसई, आयसीएसई बोर्ड के छात्रों को प्रवेश में प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन राज्य मंडल के छात्रों को प्रवेश में प्राथमिकता नहीं मिलेगी, इस तरह का डर छात्रों के मन में उत्पन्न किया जा रहा है। इसलिए छात्रों के परिजन ग्यारहवीं प्रवेश के लिए मिल मुलाक़ात कर रहे है, यह श्री. तावडे ने बताया। राज्य मंडल, सीबीएसई और आयसीएसई छात्रों का समान स्तर पर मूल्यमापन होना आवश्यक है।  ग्यारहवीं प्रवेश के लिए कुछ नामांकित महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए होड-सी है। इस बात को ध्यान में रखते हुए इन महाविद्यालयों की सीटें बढ़ाई जा सकती है क्या, इस पर बैठक ली जाएगी।
राज्य मंडल के छात्रों को इस साल अंतर्गत अंक बंद किए जाने से उन्हें जो लिखित परीक्षा में अंक मिले है, उसके आधार पर ग्यारहवीं की प्रवेश प्रक्रिया होगी। इसी पद्धति से सीबीएसई, आयसीएसई इन छात्रों को उनके लिखित परीक्षा के अंक के आधार पर ही ग्यारहवीं में  प्रवेश दिया जाए, लेकिन उनके मौखिक परीक्षा के अंक प्रवेश के समय ग्राह्य न समझे जाए, यह मांग हो रही है। इस संदर्भ में राज्य सरकार के केंद्रीय मानव ससाधन विकासमंत्रीसीबीएसई, आयसीएसई बोर्ड से चर्चा की जा रही है।
पिछले कुछ सालों की ग्यारहवीं के प्रवेश प्रक्रिया की अंक-विवरण देखे तो आयबी, आयसीएसई आदि बोर्ड के केवल ७ से ९ इतने कम संख्या से छात्र प्रवेश ले रहे है। छात्रों की संख्या अधिक नहीं है। सीबीएसई और आयसीएसई बोर्ड के लगभग साढ़ेचार प्रतिशत छात्र ग्यारहवीं में प्रवेश लेते है, यह वस्तुस्थिति है, यह बात श्री. तावडे ने इस दौरान निदर्शन में लायी है।

००००

कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत

टिप्पणी पोस्ट करा